शुक्रतीर्थ में जमीन विवाद पर गरमाया मामला, दबंगों की धमकी के बीच मोहन प्रजापति ने दिखाया दम

शुक्रतीर्थ में जमीन विवाद पर गरमाया मामला, दबंगों की धमकी के बीच मोहन प्रजापति

भारतीय अति पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने आज शुक्रतीर्थ पहुंचकर एक गंभीर जमीन विवाद मामले में पीड़ित प्रधान का समर्थन किया। मामला ग्राम प्रधान राजपाल सैनी की निजी भूमि पर दबंगों द्वारा कथित कब्जे की धमकी से जुड़ा है। हालांकि धमकी देने वाले दबंग मोहन प्रजापति के आगमन के समय पर वहां नहीं पहुंचे, लेकिन प्रशासन की सतर्कता से मामला गरमा गया।

दबंगों की धमकी के बाद सक्रिय हुआ संगठन

सूत्रों के अनुसार, कुछ दबंगों ने ग्राम प्रधान राजपाल सैनी को फोन पर धमकी दी कि वे “सैकड़ों गुंडों के साथ आएंगे और जमीन पर कब्जा कर लेंगे।” इस बात की जानकारी मिलते ही प्रधान ने मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति को इसकी सूचना दी।

प्रजापति ने चेतावनी को स्वीकार करते हुए पहले ही ऐलान कर दिया था कि वह स्वयं अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचेंगे। तय समय के अनुसार वह पहुंचे, लेकिन कथित दबंग वहां उपस्थित नहीं थे। सुबह से ही पुलिस बल तैनात रहा, जिससे संभावित टकराव टल गया।

सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप

राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा:

“भाजपा सरकार में अति पिछड़ों की जमीनों पर कब्जे की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। अब हम किसी भी कीमत पर अति पिछड़ों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि प्रशासन दबंगों के साथ मिलकर काम करेगा, तो हम सड़कों पर उतरेंगे और मुंहतोड़ जवाब देंगे।”

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “अगर किसी ने ग्राम प्रधान राजपाल सैनी की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की, तो ईंट से ईंट बजा दी जाएगी।”

संगठन के नेताओं की मौजूदगी

इस दौरान कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे:

  • रणवीर सिंह सैनी (वरिष्ठ नेता)
  • राकेश वालिया (उपाध्यक्ष)
  • विजय पाल (जिला उपाध्यक्ष)
  • रजत प्रजापति (उपाध्यक्ष)
  • यश सैनी, कृष्णपाल प्रधान, राहुल सैनी, सतीश पाल,
    विनोद कश्यप, मनोज पाल, राकेश सैनी, रविन्द्र,
    भोपाल, नितिन सैनी आदि प्रमुख कार्यकर्ता व समर्थक शामिल थे।

निष्कर्ष

शुक्रतीर्थ की इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों और सत्ता के दुरुपयोग को उजागर किया है। हालांकि पुलिस बल की उपस्थिति से स्थिति नियंत्रित रही, लेकिन संगठन ने यह साफ कर दिया है कि वे अति पिछड़ों की जमीनों पर किसी भी तरह का कब्जा नहीं होने देंगे।

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