चीन के सामान की बिक्री पर रोक की मांग, 16 मई को होगी प्रतीकात्मक होली: इकराम अहमद

चीन के सामान की बिक्री पर रोक की मांग

चीन के सामान की बिक्री पर रोक की मांग, 16 मई को होगी प्रतीकात्मक होली: इकराम अहमद

बिरगांव निगम वार्ड क्रं 28 के पार्षद MIC सदस्य इकराम अहमद ने बताया की पाकिस्तान के आतंकवादीयों ने दिनांक 22/04/2025 को हमारे निर्दोष 26 पर्याटको की हत्या कर दी थी। जिसका पूरे हिंदुस्तान के लोगों को दुःख के साथ पाकिस्तान पर आक्रोश था । हमारी बहादुर सेना ने दिनांक 07/05/2025 को पाकिस्तान मे घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को मिटटी मे मिला दिया जिसमे लगभग 100 से अधिक आतंकवादी मारे गये,पाकिस्तान ने कायराना हरकत करते हुये हिंदुस्तान के बॉर्डर पर गोलीबारी की जिसमें हमारी सेना के 5 जवान व कुछ बेकसूर लोग शहीद हुये,जिससे भारत पाकिस्तान के बीच युद्व की स्थिति बन गई।

पूरे देश मे पाकिस्तान के विरुद्ध आक्रोश व्याप्त है। उसके बाद भी चीन ने पाकिस्तान का खुलकर सर्मथन किया है इस कारण मै अपने देश के व्यापारियों से अपील करता हूँ कि चीन का समान बेचकर कर हम चीन को मजबूत ना करे, और साथ ही देशवासियों से भी अपील करता हूँ की चीन का समान बिल्कुल ना खरिदे क्योंकि चीन हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान का समर्थन करता है ।

व्यापारी चीन के समानों को तत्काल बेचना बंद करें अगर दुकानदार समान बेचना नही बंद करता है तो ऐसे दुकानदार का समान जप्ती कर कानूनी कार्यवाही की जाये इसी समबन्ध मे हमारे द्वारा बिरगांव निगम आयुक्त, नगर पुलिस अधीक्षक उरला व थाना प्रभारी खमतराई,उरला को ज्ञापन देकर व्यापारीयो को समझाने हेतु निवेदन किया गया है,हमारे द्वारा दिनांक 16/05/2025 दिन शुक्रवार दोपहर दो बजे जौहरे आज़ाम चौक गाज़ी नगर बिरगांव मे चीन के समानो की होली जलाईं जायेगी

 

One comment
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यह पाठ हिंदी में है।

यह बहुत गंभीर मुद्दा है जो देशभक्ति और आर्थिक निर्णयों को जोड़ता है। चीन का पाकिस्तान का समर्थन करना वाकई चिंताजनक है, लेकिन क्या चीनी सामान का बहिष्कार करना सही समाधान है? मुझे लगता है कि इससे हमारे छोटे व्यापारियों को नुकसान हो सकता है, जो पहले से ही आर्थिक मुश्किलों से जूछ रहे हैं। क्या हमें इसके बजाय स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए? साथ ही, क्या यह कदम हमारे अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और नुकसान पहुंचा सकता है? मैं समझना चाहूंगा कि इस तरह के आंदोलनों का दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा। क्या आपको नहीं लगता कि इस मामले में और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है?

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