आधार कार्ड के बिना इलाज को तरस रहा घायल मजदूर, तंत्र बना बेबस
चिलकाना / आधार कार्ड क्षेत्र के लोगों के लिए एक ऐसी समस्या बन गई है जिसको लेकर नगर वासी लगातार लाईन लगाकर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। लेकिन संबंधित विभाग व सरकारी कर्मचारी इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
चिलकाना नगर का डाकघर क्षेत्र में एकमात्र ऐसा स्थान है जहां आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं लेकिन वहां मशीन खराब होने के कारण आये दिन क्षेत्र के लोगों की लंबी-लंबी कतारे लगी रहती है और लोगों के महीनों तक लाईन में लगने के बाद भी समस्या का कोई हल नही हो रहा है, जो बहुत ही गंभीर चिंता का विषय है। आज के समय में बिना आधार कार्ड के कोई भी काम नहीं हो सकता। आधार के बिना हर कोई मानो आधारहीन है।
सरकारी अर्द्धसरकारी और निजी संस्थाओं में हर जगह आधार कार्ड अनिवार्य बना दिया गया है। मगर आधार कार्ड में नाम, जन्म तारीख या अन्य छोटी-मोटी गलतियों में सुधार कराने में दिक्कत होती है। इसके लिए लोग परेशान रहते हैं। कई बार वे आधार केंद्रों पर यहां से वहां भटकते रहते हैं। कोई भी सुनने और मदद करने वाला नहीं होता।
लगभग एक माह पूर्व चिलकाना में मजदूरी कर लौट रहे मजदूरों का ऑटो रिक्शा हादसाग्रस्त हो गया था, जिसमें चिलकाना क्षेत्र के गांव अहाडी निवासी सत्यपाल गंभीर रूप से घायल हो गया था। जिसे उपचार के लिए पुलिस द्वारा पीजीआई पीलखनी भर्ती कराया गया। लेकिन गंभीर हालत के चलते उसे हायर सैंटर चंडीगढ रैफर कर दिया गया था, जहां उसकी सर्जरी होनी थी।
लेकिन आधार कार्ड न होने के कारण चिकित्सको ने हाथ खडे कर दिये। तब से परिजन घायल को लेकर यहां वहां भटक रहे हैं, लेकिन आधार कार्ड के बिना किसी भी सरकारी अस्पताल में ईलाज संभव नही है।
जबकि घायल के परिजनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण प्राईवेट अस्पताल में सर्जरी कराने में समर्थ नही है, जिससे घायल व परिजन बिना आधार कार्ड के इधर उधर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं घायल व परिजनों को सर्जरी के बिना जख्मों में सैप्टिक बनने का डर सता रहा है, जिससे सत्यपाल को जान का खतरा भी हो सकता है। यदि सम्बंधित अधिकारियों द्वारा चिलकाना में आधार कार्ड बनाने की मशीन सही करा दी जाये तो क्षेत्र के लोगों को होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकता है।
Kikma
यह स्थिति वाकई बहुत दुखद है। आधार कार्ड की अनिवार्यता के कारण लोगों को इतना कष्ट उठाना पड़ रहा है, यह बिल्कुल गलत है। सत्यपाल जैसे मामलों में तो सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए। यह कैसे संभव है कि एक व्यक्ति की जान बस इसलिए खतरे में पड़ जाए क्योंकि उसके पास आधार कार्ड नहीं है? यह व्यवस्था कितनी निर्दयी हो गई है! और फिर चिलकाना में मशीन खराब होने की बात, जिसे महीनों से ठीक नहीं किया गया, यह सरकारी लापरवाही की पराकाष्ठा है। क्या वाकई इतना मुश्किल है कि मशीन को ठीक कर दिया जाए या अस्थायी व्यवस्था की जाए? सत्यपाल का इलाज कब शुरू होगा? इन सवालों के जवाब कौन देगा?