गरीब किसान पर टूटा कुदरत का कहर भारी बारिश से ढहा कच्चा मकान, दो दुधारू पशुओं की मौत ,आपदा राहत नियमावली के तहत मदद की गुहार

गरीब किसान पर टूटा कुदरत का कहर भारी बारिश से ढहा कच्चा मकान

गरीब किसान पर टूटा कुदरत का कहर भारी बारिश से ढहा कच्चा मकान, दो दुधारू पशुओं की मौत ,आपदा राहत नियमावली के तहत मदद की गुहार

शामली। जनपद शामली के गांव कच्ची गढी में लगातार हो रही भारी बारिश ने गरीब किसान मांगेराम सैनी का आशियाना छीन लिया। बारिश से मकान की नींव में पानी भर गया और अचानक उसका कच्चा हिस्सा झरझरा कर ढह गया। हादसा इतना भीषण था कि उसी हिस्से में बंधे दो दुधारू पशु मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।परिवार और ग्रामीणों ने मिलकर आनन-फानन में मलबे को हटाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पशु, जो इस परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन थे, उनकी मौत ने परिवार की कमर तोड़ दी।

गरीब किसान पर टूटा कुदरत का कहर भारी बारिश से ढहा कच्चा मकान

गरीब किसान पर टूटा कुदरत का कहर भारी बारिश से ढहा कच्चा मकान

परिजनों ने बताया कि मकान का कुछ हिस्सा पक्का बना हुआ है, जिसमें परिवार रहता है। लेकिन मकान का जो हिस्सा कच्चा बना था और जिसमें पशु बंधे हुए थे, वही हिस्सा नींव में पानी भरने से पूरी तरह गिरकर धराशायी हो गया। अब परिवार के पास न तो रहने को सुरक्षित छत बची है और न ही पेट पालने का साधन। गरीब किसान का पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर हो गया है।इस दर्दनाक घटना ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि मांगेराम बेहद मेहनती और ईमानदार इंसान हैं, जो रोज़ मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

गरीब किसान पर टूटा कुदरत का कहर भारी बारिश से ढहा कच्चा मकान

गरीब किसान पर टूटा कुदरत का कहर भारी बारिश से ढहा कच्चा मकान

लेकिन अब अचानक आई इस विपत्ति ने उनका सब कुछ छीन लिया।आपदा राहत नियमावली (SDRF/NDRF) के अनुसार मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से ढहने पर प्रभावित परिवार को सहायता का प्रावधान है।दुधारू पशु की मृत्यु पर भी शासन द्वारा मुआवज़े का प्रावधान किया गया है।साथ ही जरूरतमंद परिवार को अस्थायी रूप से जीवन-यापन के लिए भी मदद दी जाती है।ग्रामीणों ने प्रशासन और शासन से अपील की है कि इस घटना को प्राकृतिक आपदा मानते हुए तत्काल राहत दिलाई जाए। उनका कहना है कि शासन यदि समय रहते परिवार की मदद करता है, तो यह परिवार दोबारा खड़ा हो सकता है, वरना यह दुख और अभाव में बुरी तरह टूट जाएगा।

आज मांगेराम और उनका परिवार सिर्फ एक ही उम्मीद लगाए बैठा है – कि शासन-प्रशासन उनकी इस पीड़ा को समझे और नियमावली के तहत उन्हें राहत पहुंचाए। यह हादसा न सिर्फ एक परिवार का दुःख है, बल्कि पूरे गांव की वेदना बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *