शामली में 12 दिन के प्रवास के दौरान झिंझाना क्षेत्र के गांवों में पहुंच रही अखंड ज्योति कलश यात्रा

शामली में 12 दिन के प्रवास के दौरान

शामली में 12 दिन के प्रवास के दौरान झिंझाना क्षेत्र के गांवों में पहुंच रही अखंड ज्योति कलश यात्रा

बैदखेडी के अलावा बीबीपुर जलालाबाद, डेरा खजूर वाला आदि गांव में पहुंची शांतिकुंज हरिद्वार से आई अखंड ज्योति यात्रा

झिंझाना। सनातन धर्म को और मजबूत करने के लिए पूरे भारत में चलाए जा रहे जन जागरूकता अभियान के अंतर्गत हिमालय से लाई गई अखंड ज्योति कलश यात्रा शामली में अपने 12 दिवसीय प्रवास के दौरान आज झिंझाना के बैदखेड़ी में पहुंची। जहां इस यात्रा का स्वागत करने के बाद गांव के शिव मंदिर में हवन का आयोजन किया गया। और पूरे गांव में परिक्रमा निकाली गई । उसके बाद यह यात्रा क्षेत्र के ही गांव बीबीपुर, डेरा खजूर वाला आदि गांवों के लिए रवाना हो गई ।
यात्रा के साथ हरिद्वार से आए महंत मेनपाल सिंह ने बताया कि 1926 में दादा सर्वेश्वरानंद जी महाराज द्वारा हिमालय से अखंड ज्योति आगरा के आंवला खेड़ा में लाई गई थी। कुछ समय बाद वेद मूर्ति तपनिस्ठ श्री राम शर्मा जी को दर्शन देकर सर्वेश्वरानंद जी महाराज ने कि ज्योति के माध्यम से पूरे भारत में एक जन जागरूकता अभियान चलाकर एक नए युग निर्माण करने का आदेश दिया था।

तभी से श्रीराम शर्मा जी ने पहले मथुरा और फिर हरिद्वार के शांतिकुंज में इस ज्योति को स्थापित किया था। और 19 जनवरी 2025 से पूरे भारतवर्ष में इस अखंड ज्योति के माध्यम से भारतवासियों को सनातन धर्म को जागृत करने का काम चल रहा है। और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में मेनपाल सिंह ने अपनी यह अखंड ज्योति यात्रा शुरू की हुई है। यह यात्रा मुजफ्फरनगर के बाद 4 सितंबर 2025 को शामली जनपद के थानाभवन आदि गांवों में पहुंची।
टीम लीडर मैनपाल सिंह ने यह भी बताया कि गुरु माता के प्राकट्य दिवस पर हरिद्वार के शांतिकुंज में 18 जनवरी 2026 को जन्म शताब्दी वर्ष मनाया जाएगा। तब तक इस अखंड ज्योति यात्रा को पूरे भारत में ले जाकर जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य मानव में देवत्व का उदय हो और पृथ्वी पर स्वर्ग का अवतरण होना बताया गया है। इस यात्रा से ग्रामीणों में भी उत्साह की लहर है। बताया गया कि सर्वेश्वरानंद जी महाराज आज भी सूक्ष्म रूप में हिमालय पर्वत पर लीन है।

कैसे तपोनिष्ठ हुए श्रीराम शर्मा

महंत मेनपाल सिंह ने बताया कि जिस समय युग निर्माण के लिए सर्वेश्वरानंद जी महाराज ने ने श्रीराम शर्मा जी को इस अखंड ज्योति के माध्यम से नए युग का निर्माण करने की बात कही तो उस समय में श्रीराम शर्मा जी ने भी पूरी निष्ठा के साथ तप किया और एक उपलब्धि हासिल की तपस्या के दौरान उन्होंने अपने गुरु का ध्यान नहीं छोड़ा। और गाय को जो खिलाने के बाद गोबर में निकले हुए जो के दोनों को धोकर पिसवाये गए आटे की रोटियां मट्ठे के साथ खाकर तपस्या पूरी की थी तभी से श्रीराम शर्मा लिस्ट हुए थे तपोनिष्ठ हुए थे।

दैनिक सर्वे बुलेटिन

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