बाबासाहेब के जीवन पर आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम
राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कांधला में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में चल रहे 15 दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सद्भावना कल्चरल क्लब के तहत आयोजित किया गया, जिसमें महाविद्यालय की छात्राओं को डॉ. अंबेडकर की लेखनी और विचारधारा पर मार्गदर्शन दिया गया।
बाबा साहेब की लेखनी – समाज में बदलाव का एक अहम पहलू
विशेष व्याख्यान में डॉ. रामायण राम ने छात्राओं को डॉ. भीमराव अंबेडकर के लेखन के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “बाबा साहेब ने न केवल भारतीय समाज के समाजिक ढांचे को समझा, बल्कि उसे बदलने के लिए अपनी लेखनी का उपयोग किया। उनकी लेखनी ने देश-विदेश में फैले जाति व्यवस्था और समाजिक असमानताओं के खिलाफ आवाज उठाई।”
बाबा साहेब की लेखनी – समाज में बदलाव का एक अहम पहलू
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान की दिशा में योगदान
डॉ. रामायण राम ने बाबा साहेब के योगदान को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर की सोच ने समाज में एक नई क्रांति की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने जातिवाद और अस्पृश्यता जैसे मुद्दों पर न केवल विचार किए, बल्कि उन्हें समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए।
बाबा साहेब की प्रमुख रचनाएं
डॉ. रामायण ने बाबा साहेब की प्रमुख किताबों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें उनके विचारों को विस्तार से समझा जा सकता है। इनमें प्रमुख रचनाएं हैं:
- Annihilation of Caste (जाति का विनाश)
- Buddha and His Dhamma (बुद्ध और उनका धर्म)
- The Untouchables: Who Are They and Why They Have Become Untouchables (अछूत: वे कौन हैं और वे अछूत क्यों बने)
उन्होंने इन किताबों के माध्यम से जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ अपने तर्क दिए हैं और समाज में बदलाव की जरूरत को रेखांकित किया है। इसके साथ ही उन्होंने बाबा साहेब द्वारा स्थापित पत्रिकाओं मूकनायक, बहिष्कृत भारत, समता, और जनता के बारे में भी बताया, जो उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनीं।
महाविद्यालय का स्टाफ और छात्राओं का उपस्थित होना
कार्यक्रम में महाविद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद थीं। उन्होंने इस कार्यक्रम से प्रेरित होकर बाबा साहेब के जीवन और उनकी रचनाओं के बारे में और अधिक जानने का संकल्प लिया।
समाप्ति
यह कार्यक्रम महाविद्यालय में बाबा साहेब की जयंती को यादगार बनाने के लिए आयोजित किया गया था, और इसके माध्यम से छात्राओं में सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की गई।
कांधला, शामली
रिपोर्ट: दैनिक सर्वे बुलेटिन
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