शंका मानव के विनाश का कारण बनती है: योगी राज राजेश्वर महाराज
चिलकाना – क्षेत्र के ग्राम पटनी शिव मंदिर में चल रही श्री रामकथा में प्रवचन करते हुए दिव्य योगी राज राजेश्वर महाराज ने कहा कि शंका मानव के विनाश का कारण बनती है अतः किसी भी स्थिति में शंका का समाधान समय रहते कर लेना चाहिए अन्यथा सती जैसी दशा हो जाती है सती ने अपनी भक्ति के बल से नव जीवन पाकर पार्वती रूप में पुनः शिव से विवाह कर अपने जीवन को सार्थक किया।
आचार्य जी ने कहा कि शिव का सर्वस्व जीवन श्री राम की भक्ति को समर्पित है। किसी व्यक्ति या वस्तु के प्रति वफादारी, प्यार, देखभाल, समर्पण एवं इष्ट देवता के प्रति श्रद्धा ही भक्ति कहलाती हैं। भक्ति शब्द का प्रयोग किसी के प्रति समर्पण के लिए किया जाता है, स्कन्द पुराण के अनुसार माता पार्वती के पसीने से बेलपत्र के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी।
एक समय माता पार्वती को ललाट पर बहुत पसीना आ रहा था। उन्होंने अपनी उंगलियों से पसीना पोछकर उसकी बूंदों को छटक दिया ओर ये बूंदें मंदराचल पर्वत पर जाकर गिरी, तो इन बूंदों से बेलपत्र के पेड़ की उत्पत्ति हुई। बेलपत्र में माता पार्वती का प्रतिबिंब होने के कारण यह भगवान शिव का प्रिय है
बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिदेव का प्रतीक हैं, तीन पत्ते वाले बेलपत्र में सत, रज और तम तीनों गुण होते हैं, बेलपत्र का वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, ओर जड़ों को गिरजा का स्वरूप माना गया है।
जिस पर राम का नाम लिखकर अर्पित करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं।
कथा के मुख्य यजमान विपिन सैनी, पत्नी सोनिया सैनी, नितिन गोयल, जूली सैनी, सीमा सैनी, अदिति गुप्ता व कन्हैया शर्मा रहे।
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